आईआईएमसी में पहली बार पीएचडी कोर्स शुरू, 60 साल की विरासत में ऐतिहासिक कदम
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आईआईएमसी ने 60 साल की विरासत में पहली बार मीडिया और जनसंचार में पीएच.डी. कार्यक्रम शुरू किया, प्रवेश प्रक्रिया 1 जनवरी 2026 से।
पीएच.डी. पाठ्यक्रम में पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया और स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन जैसे उभरते क्षेत्रों में इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को बढ़ावा।
यूजीसी-नेट योग्य उम्मीदवारों को सीधा साक्षात्कार, कोर्सवर्क 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा।
दिल्ली/ भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) ने अपनी 60 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ते हुए पहली बार पीएच.डी. पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। 1 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से शुरू हुए इस डॉक्टरेट कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारिता, मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में उच्चस्तरीय अनुसंधान को सशक्त बनाना है। यह पहल उभरते मीडिया परिदृश्य में अकादमिक नेतृत्व तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आईआईएमसी (डीम्ड विश्वविद्यालय) ने शैक्षणिक वर्ष 2025–26 के लिए मीडिया और जनसंचार में अपने पहले पीएच.डी. कार्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्यक्रम पूर्णकालिक और अंशकालिक दोनों श्रेणियों के शोधार्थियों के लिए उपलब्ध होगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 30 जनवरी 2026 तक चलेगी।
यूजीसी-नेट उत्तीर्ण उम्मीदवारों को सीधे साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जबकि यूजीसी-नेट के बिना आवेदन करने वाले अंशकालिक अभ्यर्थियों के लिए 15 फरवरी 2026 को प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों की सूची 23 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी और साक्षात्कार 9 मार्च 2026 से आरंभ होंगे। पूरी प्रवेश प्रक्रिया 27 मार्च 2026 तक पूर्ण कर ली जाएगी, जबकि कोर्सवर्क की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित है।
पीएच.डी. प्रवेश पोर्टल के शुभारंभ अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत-केंद्रित, नवोन्मेषी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शोध केवल अकादमिक अभ्यास तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं का समाधान प्रस्तुत करे।
पीएच.डी. कार्यक्रम की शुरुआत के प्रतीकात्मक क्षण के रूप में कुलपति ने आईआईएमसी, नई दिल्ली परिसर में ‘ज्ञान वृक्ष’ के रूप में कोविदार का पौधा रोपा, जो ज्ञान, शोध और दीर्घकालिक अकादमिक विकास का प्रतीक है।
यह डॉक्टरेट कार्यक्रम एक मजबूत शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसमें इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे शोधार्थी पत्रकारिता, जनसंचार, डिजिटल मीडिया, स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन, मीडिया इंडस्ट्री मैनेजमेंट, फिल्म अध्ययन, पॉलिटिकल कम्युनिकेशन, डेवलपमेंट कम्युनिकेशन, विज्ञापन और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में गहन अध्ययन कर सकेंगे।
आईआईएमसी प्रशासन का मानना है कि यह पीएच.डी. कार्यक्रम न केवल मीडिया अनुसंधान में नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत के बदलते मीडिया परिदृश्य को समझने और दिशा देने वाले विद्वानों की एक नई पीढ़ी भी तैयार करेगा। 60 वर्षों से पत्रकारिता शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहे आईआईएमसी के लिए यह पहल उसकी अकादमिक पहचान को और सुदृढ़ करने वाली मानी जा रही है।